Sunday, January 2, 2011

नए साल के संकल्प

वर्ष 2010 ‘महंगाई डायन’ के नाम रहा। बचत करने के सारे प्लान धरे के धरे रह गए और साल ख़त्म हो गया। अब नया साल शुरू हो चुका है। ये सोचने का वक्त है कि क्या 2011 भी पिछले साल की तरह ही ख़त्म हो जाएगा। चलिए नए साल में हम संकल्प लेते हैं जो अपने पर्सनल फायनेंस को सुधारने का। हम आपको कुछ स्मार्ट टिप्स दे रहे हैं जो आपके लिए काफी काम के हो सकते हैं।
सबसे पहले थोड़ा वक़्त निकालकर अपने पिछले साल के खर्च को याद करते हैं। पिछले साल आपके साथ भी ऐसा तो नहीं हुआ कि हाथ में पैसा आता था और मुट्ठी बांधने से पहले ही निकल जाता था। चिंता की कोई बात नहीं, ऐसा ही ज्यादातर लोगों के साथ हुआ था। ऐसा 2011 में नहीं होना चाहिए इसके लिए अभी से तैयारी में जुट जाना होगा। फ्यूचर प्लानिंग और समझादारी के साथ थोड़ी सी कंजूसी करना शुरू कर दें तो आप भी इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

लक्ष्य तय करें
आप पैसा क्यों बचाना चाहते हैं आपको पता होना चाहिए। इसी के मुताबिक एक लक्ष्य बना लें। साल के आखिर में छुट्टियां मनाने के लिए पैसा बचाना है या बच्चे का स्कूल में एडमिशन करना है या फिर घर खरीदनें की सोच रहे हैं। या फिर बेटे-बेटी को डॉक्टर-इंजीनियर बनाना है या उनकी शादी के लिए पैसे बचाना है। यह तय हो जाने के बाद आपकी मुश्किल काफी आसान हो जाएगी। आप अगर ऊपर बताए गए सभी काम के लिए पैसे बचाना चाहते हैं तो आपको अभी से पूरी इमानदारी के साथ इस काम में जुटना होगा।

बचत कैसे करें
अक्सर होता यह है कि मंथली खर्च से बचने वाला पैसा सेविंग एकाउंट में पड़ा रहता है। इसके दो नुकसान हैं। पहला ये कि इसपर ब्याज काफी कम मिलता है और दूसरा छोटी-मोटी जरूरत पर भी आदमी पैसे आसानी से निकाल लेता है। पहले ये तय कर लें कि पैसा किस काम के लिए कहां इनवेस्ट करना है। फिर बैंकों की ईसीएस यानी इलेक्ट्रानिक क्लियरेंस सिस्टम का इस्तेमाल करें। बस आपको एकबार फॉर्म भरने होंगे और फिर चेक भरने जैसे थकाऊ काम से छुट्टी मिल जाएगी। अगर आप ये भी नहीं करना चाहते तो ऑनलाइन बैंकिंग सुविधा का लाफ भी उठा सकते हैं। रेकरिंग एकाउंट, म्यूचुअल फंड, पेपर गोल्ड, शेयर या पोस्ट आफिस सेविंग स्कीम में ईसीएस के जरिये इनवेस्टमेंट कर सकते हैं।

वित्तीय जानकारी बढ़ाएं
फायनेंस एक एक ऐसा क्षेत्र है जिससे ज्यादातर लोग डरते हैं। डरने की वजह भी है, जब कोई थोड़े वक़्त में सबकुछ जान लेने की कोशिश करता है तो दिक्कत होगी ही। शुरुआत साधारण तरीके से करें, जैसे बांड क्या है, म्यूचुअल फंड कैसे काम करता है, इंश्योरेंश और बचत में क्या फर्क है, शेयर में कैसे इनवेस्ट करना चाहिए, कमोडिटी एक्सचेंज कैसे काम करता है। आप जो कुछ भी सीखें उसे खुद पर अप्लाई करें ताकि उसके फायदे से रु-ब-रु हो सकें। अखबार, पत्रिकाएं और इंटरनेट इसमें आपकी सहायक हो सकती हैं।

कर्ज से छुटकारा पाएं
बचत का सबसे बड़ा दुश्मन होता है कर्ज। क्रेडिट कार्ड से की गई बेलगाम खरीददारी और पर्सनल लोन आपके सभी प्लान को चौपट कर सकते हैं। क्रेडिट कार्ड के कर्ज पर भारी ब्याज चुकाना पड़ता है। इसी तरह पर्सनल लोन पर भी ब्याज दर 15 से 18 फीसदी तक देना होता है। कोशिश करें कि क्रेडिट कार्ड के बकाये और पर्सनल लोन को जल्दी से जल्दी चुका दें। इसमें आप रिश्तेदारों और दोस्तों का सहयोग ले सकते हैं। आपने अगर एक बार कर्ज से छुटकारा पा लिया तो समझिए आपने आधी बाजी मार ली।

साल का प्लान बनाएं
अक्सर कुछ ऐसे खर्च आ जाते हैं जिनका अनुमान नहीं होता। तब पूरी प्लानिंग धरी की धरी रह जाती है। इसके लिए जरूरी है कि कुछ पैसे इमरजेंसी फंड के तौर पर जरूर बचाएं।
इस बात का ध्यान जरूर रखें कि लक्ष्य इतना बड़ा न बन जाए जिसे पूरा करने में पसीने छूटने लगे। शुरुआत छोटी बचत से करें। जितना बचा पाते हैं उसी से शुरुआत करें। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ‘महंगाई डायन’ से कैसे पार पाएं। 2011 में भी महंगाई से छुटकारा मिलेगी इसकी कोई संभावना नहीं दिख रही। कोई बात नहीं महंगाई से मुकाबले के लिए भी बचत जरूरी है इस गुरुमंत्र को याद कर लें।

बात पते की...
हममे से ज्यादातर लोग हर साल अपने पर्सनल फायनेंस को ठीक करने का संकल्प लेते हैं लेकिन तमाम बहानों के साथ उससे किनारा भी कर लेते हैं। लेकिन 2011 में ऐसा नहीं होगा चलिए ये संकल्प लेते हैं।

1 comment:

Ek ziddi dhun said...

devendra yaar apna lakshy achanak apke ghar aakar cha-pani, bhojan kar apke plan ko gadbadana hai. tayyar rahiyega